सुल्तानपुर में आज जिला अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही देखने को मिली है। जौनपुर के रहने वाले दंपत्ति पोते की मौत के बाद शव वाहन के दौड़ते रहे लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों पर कोई असर न हुआ। थकहार का दंपत्ति बस अड्डे पहुंचे तो बस वाले ने भी शव को साथ ले जाने से इंकार कर दिया। बाद में स्थानीय लोगों और पुलिस वालों ने उसे जबरन बस में बैठाकर कादीपुर पहुंचवाया जहाँ से ई रिक्शे की मदद से उसे अपने घर भिजवाया गया।

दरअसल सुल्तानपुर के पडोसी जनपद जौनपुर के सरपतहा थानाक्षेत्र के उसरौली गांव के रहने वाले 3 वर्षीय दिव्यांश की तबियत आज सुबह अचानक ख़राब हो गई। जिसके बाद उसके बाबा रामयज्ञ विन्द उसे कादीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य के ले गए। लेकिन हालत बिगड़ता देख डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल पहुंचने पर उसका इलाज तो हुआ लेकिन दिव्यांश की मौत हो गई। मौत के बाद परिजन उसका शव ले जाने के लिये शव वाहन की तलाश करते रहे। 108 एम्बुलेंस वाले ने 1800 रुपयों की डिमांड की तो पैसा  न होने की वे गोहार लगाते रहे लेकिन की किसी का दिल नही पसीजा। थकहार रामयज्ञ पैदल ही अपनी पत्नी और पोते को लेकर बस अड्डे पहुंचा, लेकिन वहां भी रोडवेज़ वालों ने उसे बस में बैठाने ने इंकार कर दिया। इस बात की जानकारी जब स्थानीय लोगों हुई  तो बस से ले जाने के लिये उन्होंने हंगामा शुरू किया। बाद में वहां पहुंची पुलिस ने जब कड़ाई की तो बस वाला उन्हें बैठाकर कादीपुर तक ले गया। वहां पहुंचने पर उसने अपनी आपबीती सुनाई जिसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से ई रिक्शे के जरिये उसे उसके घर तक पहुंचवाया गया।




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