Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Classic Header

{fbt_classic_header}

Breaking News

latest

मझवार,तुरैहा,गोंड को परिभाषित करने को संसद में बिल लाये केन्द्र सरकार

  कहाँ गया भाजपा का फिशरमैन विजन डाक्यूमेंट्स, अब राम-निषाद राज की मित्रता की बात बन्द करे Lukhnow।27 सितम्बर।उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जाति ...

 

कहाँ गया भाजपा का फिशरमैन विजन डाक्यूमेंट्स, अब राम-निषाद राज की मित्रता की बात बन्द करे

Lukhnow।27 सितम्बर।उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जाति के क्रमांक-51 पर मझवार जाति अंकित है।सेन्सस-1961 के अनुसार अनुसूचित जातियों के साथ उनकी पर्यायवाची/समनामी व वंशानुगत जातियों का उल्लेख किया गया है।मझवार की पर्यायवाची व वंशानुगत जाति के रूप में मल्लाह,केवट,माँझी, गोंड मझवार का स्पष्ठ उल्लेख किया गया है।इसी सेन्सस में अनुसूचित जाति के रूप में क्रमांक-24 पर चमार,जाटव,झुसिया,धुसिया को अंकित किया गया है और उसकी पर्यायवाची व वंशानुगत जाति नामके रूप में जाटवी,जटीवा, अहिरवार,दोहरे,दोहरा,नीम,पिपैल, कर्दम, कबीरपंथी,रमदसिया,रैदासी,रविदासी,दबकर,मोची,कुरील आदि का उल्लेख है।इन्हें निर्बाध रूप से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत किया जाता है।पर मल्लाह,केवट,मांझी आदि को मझवार का प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जाता है। संवैधानिक आरक्षण संघर्ष मोर्चा जिला मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव जय भगवान कश्यप ने प्रदेश सरकार से स्पष्टीकरण करते हुए केन्द्र सरकार को संस्तुति भेजकर मझवार,तुरैहा, गोंड की समस्याओं के समाधान की मांग किया है।वही केन्द्र सरकार से मझवार,गोंड, तुरैहा को चमार,वाल्मीकि आदि तरह परिभाषित करने हेतु संसद में बिल पेश करने की मांग किया है।  कश्यप ने बताया कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव-2012 में संकल्प लिया था कि भाजपा की सरकार बनने पर कश्यप निषाद/मछुआरा जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाया जायेगा।5 अक्टूबर,2013 को दिल्ली के मावलंकर ऑडिटोरियम में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी व स्वर्गीया सुषमा स्वराज ने फिशरमैन डाक्यूमेंट्स/मछुआरा दृषिपत्र जारी करते हुए संकल्प लिया था कि 2014 में भाजपा सरकार बनने पर मछुआरों की आरक्षण विसंगति को दूर किया जाएगा।पर भाजपा ने कश्यप निषाद/मछुआरों के साथ वादाखिलाफी किया है। कश्यप निषाद ने खाकी कई चुनावों में भाजपा व उसके आनुषांगिक संगठनों ने श्रीराम-निषादराज की मित्रता का बखान कर कश्यप निषाद जातियों का वोटबैंक लिया,पर सत्ता में आने के बाद आरक्षण देना तो दूर कश्यप निषाद मछुआरों के परम्परागत पुश्तैनी पेशों को छीनकर माफियाओं, पूंजीपतियों व सामंतों के हाथों नीलाम कर छीनने का ही काम किया।सपा सरकार ने मत्स्यपालन को कृषि का दर्जा व निषादराज व महर्षि कश्यप जयंती के लिए 5 अप्रैल को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था, जिसे योगी सरकार ने खत्म कर दिया।उन्होंने कहा कि  भाजपा श्रीराम-श्री निषादराज की मित्रता का हवाला देकर ब्लैकमेलिंग का काम बन्द करे। कश्यप निषाद समाज भाजपा के छल-कपट व धूर्तता को समझ गया है,अब उसके झूठे झाँसे व बहकावे में आने वाला नहीं है। जब जब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी,उसने कश्यप निषाद मछुआरा समुदाय के परंपरागत पुश्तैनी पेशों -मत्स्यपालन, मत्स्याखेट व शिकारमाही,बालू-मौरम खनन आदि को सार्वजनिक कर माफियाओं,सामन्ती बाहुबलियों के हाथों नीलाम कर बर्बाद करने का काम किया।जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे तो समुन्द्रों में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को ट्रॉलर द्वारा मछली पकड़ने का ठेका दे दिए।उड़ीसा की चिल्का झील को नीलाम कर दिए।उन्होंने कहा कि भाजपा को गांव-किसान,नौजवान व मछुआरों से कोई लेना देना नहीं,क्योंकि भाजपा पूंजीपतियों व मनुवादियों की फिरकापरस्त पार्टी है।भाजपा पिछड़ा-अतिपिछड़ा व दलित-अतिदलित तथा हिन्दू-मुस्लिम में नफरत पैदा कर राजनीति करती है।इससे सामाजिक न्याय की कल्पना करना खुद मूर्खता है।

No comments